Posts

बेबाक बोल

                                                           बन्दूक बनाम कलम जहाँ मस्तिष्क भय से मुक्त हो और सिर उन्नत हो,जहाँ ज्ञान स्वतंत्र हो,जहाँ विश्व का संकीर्ण गृह-प्राचीरों ने विभाजन न किया हो,जहाँ तर्क का निर्मल प्रवाह रूढ़ आदतों की सूखी रेत में खो न गया हो, हे पिता उस स्वर्ग में ही मेरे देश को जगा. रविन्द्र नाथ टैगोर के ये विचार हमारे देश के भविष्य के बारे में थे जो किसी समाज के उन्नत और प्रगतिशील होने की गवाही देते हैं. परन्तु जो स्थिति आज हमारे सामने है वह निश्चय ही घोर चिंताजनक है. कलम की शांतिप्रिय गूँज को बन्दूक के शोर से दबाने की कोशिश हो रही है.ये हमें प्रगति की उल्टी धारा में बहा कर ले जायेगी. बहुलतावाद और विचारों की भिन्नता ही मानव समाज की प्रगति का आधार है ,एक समान विचार और सोच समाज को जड़ बना देंगे. हमारा तो इतिहास ही इस बात का गवाह रहा है की हमने सभी प्रकार के विचारों को जगह दी है उन्हे...